आत्मनिर्भर भारत में महिला उद्यमिता

 

नुसरत जहॉ

अतिथि व्याख्याता, शासकीय नवीन महाविद्यालय, बोरी, जिला दुर्ग (छ.ग.)

*Corresponding Author E-mail:

 

ABSTRACT:

भारत को आत्मनिर्भर बनाने में  महिलाओं का योगदान सब से प्रभावी रहा है। महिलाओं ने  घर की चार दीवारी एवं  दासता की जंजीरों को अब तोड़ डाला है। भारत तेजी से विकास की ओर अग्रसर है जिसमें महिलाएं किसी की गुलाम न होकर स्वयं को प्रशिक्षित करते हुए, उद्यम हो रही है। अर्थव्यवस्था के विकास के लिए महिला उद्यमियों की भूमिका महत्वपूर्ण है, इसलिए महिलाओं को उद्यम चलाने से जुडी गतिविधियों की ओर आकर्षित करने का वातावरण तैयार करना जरूरी है। महिला उद्यमिता देश को आत्मनिर्भर बनाने  का अहम पहलू है। इसमे रोजगार के अवसर जुटा कर अर्थव्यवस्था तो मजबूत होती ही है, महिलाओं का भी सामाजिक और व्यक्तिगत दृष्टि से उत्थान होता है। इस शोध पत्र में महिला उद्यमियों के महत्व, उनके सामने वाली चुनौनियों , भारतीय अर्थव्यवस्था में उनकी अहम भूमिका और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में उनके योगदान के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है।

 

KEYWORDS:  आत्मनिर्भर, भारत, महिला उद्यमिता

 


 


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महिला उद्यमियों की संरचना में तेजी से वृध्दि हुई है और विभिन्न उद्योगों में उन्हे पहचान और मान्यता भी मिल रही है। रोजगार के नए अवसर जटाने बौर सकल घरेलू उत्पादन बढ़ाने तथा गरीबी दुर करने और सामाजिक समावेशन के माध्यम से महिलाएँ उद्यमशीलता और आर्थिक विकास से जुड़ी गतिविधियों मं उल्लेखनीय योगदान कर रही है। सरकार महिला उद्यमिता का मतलब समझती है और महिला उद्यमियों की प्रोत्साहन देने का प्रयास कर रही है। एक अध्ययन के अनुसार महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने से उद्यमों की सफलता पर अनुकुल प्रभाव पड्ता है। अद्यमशीलता को प्रोत्साहन देने से जूडी विभिन्न वस्तुओं मं अकांक्षा, कौशल और अनुभव, परिवार का समर्थन, बाजार, संभावना स्वतंत्रता, सरकारी सहायता और कार्य संपन्न करने का  संतोष आदि शामिल है।

 

वर्तमान परिवेश में महिलाउद्यमशीलता की अवधारणा का विश्लेषण और व्यवस्था करना और भारतीय उद्यमियों के समक्ष चुनौतियों और विशेष पहलुओं की व्यापक समीक्षा करना तथा भारतीय अर्थव्यवस्था में महिला उद्यमियों  की भूमिका और आत्मनिर्भर भारत के  निर्माण में उनके योगदान पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। महिला उद्यमी वही है जो अपना उद्यम शुरू करने, उसकी व्यवस्था संभालने और उसके लिए वित्तिय संसाधनों का प्रबंधन करने के सभी दायित्व निभाती है। भारत सरकारके अनुसार महिला उद्यमी हाने के लिए उद्यम की वित्तिय भागीदारी में कम से कम 50 प्रतिशत योगदान होना आवश्यक है। इस तरह, प्रमुख वित्तिय भागीदारी होने पर ही वह महिला उद्यमी की श्रेणी में मानी जाएगी।

 

शोध का उद्देश्य –

इस शोध पत्र का उद्देश्य आत्म निर्भर भारत के संदर्भ में महिला उद्यमिता की भूमिका का विस्तृत विश्लेषण किया गया है जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता, वकील, पूलिस, जन प्रतिनिधि एवं अन्य लोगों से कुछ प्रश्न पूछ हॉ, नही एवं कुछ नही कह सकते में विकल्प लिए गये है, इस तरह साक्षात्कार कर आंकडों का संकलन किया गया है। इसमें प्रश्न इस प्रकार है जहॉ लगभग 100 उत्तरदाताओं से सवाल किया गया है।

 

प्रश्न 1 - क्या आत्म-निर्भर भारत की पहल, महिला उद्यमियों को प्रभावित कर रही है?

 

विश्लेषण - उपयुक्त तालिका के विश्लेषण से यह ज्ञात होता है कि आत्म निर्भर भारत की पहल होने के बाद महिलाओं को अपने अधिकारों एवं अपने उद्यमी होने का विश्वास होने लगा है जिस पर 50 प्रतिशत उत्तरदाता हॉ में जवाब दे रहे है किन्तु 50 प्रतिशत उत्तरदाता हॉ में जवाब दे रहे है किन्तु 40 प्रतिशत महिलाओं को ये लगता है कि महिला आज भी अपने बल-बूते पर कुछ नही कर सकती और पुरूषों पर निर्भर है वहॉ 10 प्रतिशत उत्तरदाता इस बात से अनभिज्ञ है और वह इस प्रश्न पर कुछ नही कर सकते।

 

प्रश्न 2 - क्या महिला उद्यमियों को प्रशिक्षण और विकास के लिए अवसर उपलब्ध है।

 

विश्लेषण - उपयुक्त ग्राफ के विश्लेषण से यह पता है चलता है कि. 60 प्रतिशत उत्तरदाता यह कहते है कि महिला उद्यमियों को प्रशिक्षण और विकास के लिए बहुत सी योजनाएं चलाई गयी है जिसको सब से बढ़ा योगदान एमएसएसई मंत्रालय का है जिसके अंतगर्त महिला उद्यमियों को न ही अवसर उपलब्ध है वरन् उन्हे पहले से बेहतर रोजगार  प्राप्त हो  रहा है। वही 35 प्रतिशत उत्तरदाता यह कहते है कि शासन के द्वारा योजनाओं का सिर्फ नाम एवं प्रचार किया जाता है महिलाओं महिलाओं को इससे कुछ लाभ नही मिल नहा है 50 प्रतिशत उत्तरदाताओं का करना है कि उन्हे इस सवाल से कोई मतलब नही और वह कुछ नही कर सकते है।

 

चुनौतियॉ –

उद्यमियों को सामान्यता भी अनेकानेक कठिनाइयॉ और चुनौतियॉ झेलनी पड़ती हे और ऐसे में महिला उद्यमियों के लिए तो फंड जुटाने और वित्तिय व्यवस्था करने से लेकर विपणन, प्रशिक्षण सरकारी समर्थन प्राप्त करने, मौलिकता लाने और नये विचार अपनाने की चुनौतियों का सामना करने के साथ की कुछ समस्याओं का सामना करना होता है। काम के दबाव और व्यक्तिगता प्रतिबध्दताओं के कारण भी महिलाओं के दायित्व बेहद तनावपूर्ण हो जाते है।

 

साथ ही अनिश्चितता से की  महिलाएं काफी दबाव में रहती हैं। उनमें असफलता का भय बना रहता है खासकर इसलिए की लोगों को उसकी व्यापार क्षमता के बारे में संदेह रहता है। उन्हे व्यापार में इसलिए भी संघर्ष करना पड़ता है क्योकी उन्हें समर्थन  देने की व्यवस्था की समुचित नही है। उन्हें संबंध स्त्रोतों से समर्थन प्राप्त करने में भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। महिलाओं को पुरूष -प्रधान मानसिकता वाले माहौल में काम करना होता है जहॉ उन्हे भेदभाव और सामाजिक लांछन से निपटना पड़ता है। यह तो यही है कि कानूनो और नितियों के लागू हो जाने से महिलाओं के लिए व्यापार करने की स्थितियां अनुकूल बनी हैं परन्तु नए बदलाव अभी लागू ही हो पाए है। महिला उद्यमियों के समक्ष एक चुनौती यह भी है कि सामाजिक बंधनों और परंपरागत सोच के कानण उनका व्यापार नेटवर्क इतना जमा हुआ नही रहता और उन्हे हर प्रयास स्वयं ही करना पड़ता है। इसी कारण महिलाओं की व्यापार भागीदारी का दायरा सीमित  और सिमटा हुआ रहता है।

 

भारत में अब स्टार्ट-अप के निरंतर विस्तार से अब ज्यादा संख्या में महिलाएँ अपने उद्यम लगाने में रूचि ले रही है । और कारोबार मे सफलता भी प्राप्त कर रही है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के अनुसार देश के कुल उद्यमियों में से केवल 15 प्रतिशत की महिलाएं है। इनमें से अधिकांश व्यापार स्व-वित्तपोषित है। छोटे पैमाने पर भी चलाए जा रहे है। भारत जैसे देश में जहॉ महिलाओं को अपनी ताकत का अंदाजा नही है बहुत कम उद्यमी महिला सफल हो पाती है। ये महिला उद्यमी उन महिलाओं की रोल मॉडल (आदर्श) होती है जो अपना उद्यम शुरू करना चाहती है। तभी तो भारत लगातार इस दिशा में आगें बढ़ रहा है और देश में महिला उद्यमियों को स्टार्ट-अप लगाने के लिए अनुकुल माहौल और तगड़ा सरकारी समर्थन मिल रहा है।

 

सरकार के विभिन्न कदम –

अर्थव्यवस्था के विकास के लिए महिला उद्यमियों की भूमिका महत्वपूर्ण है, इसलिए महिलाओं को उद्यम चलाने में जुड़ी गतिविधियों की ओर आकर्षित करने का वातावरण तैयार करना जरूरी है। भारत सरकार ने अपने उद्यम शुरू करने वाली महिलाओं के लिए अनेक प्रशिक्षणा कार्यक्रम और विकास के साथ-साथ रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के कार्यक्रम तैयार किए गए है।

·      विशेष लक्षित समूह: देश के सभी प्रमुख विकास कार्यक्रमों में महिलाओं को विशेष लक्षित समूह मानने के उद्देश्य से यह सुझाव लाया गया था।

·      नए उपकरण विकसित करना: उपयुक्त औद्योगिकी, उपकरण और कार्य, विधियॉ अपनाकर महिला उद्यमियों की कार्यकुशलता और उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास किये जाने चाहिए।

·      घर व्यवस्था में सहायता: यह सुझाव महिला उद्यमियों के उत्पादों की बिक्री की समुचित व्यवस्था करने में आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाया गया था।

·      निर्णय लेने की व्यवस्था: यह सुझाव महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करने के विचार से लाया गया है। इसके साथ ही ऐसे अनेक संगठन है जो भारत में महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन दे रहे है। ये संगठन विकास संबंधी समर्थन उपलब्ध कराके इन महिला उद्यमियों की मदद करते है।

 

1.  महिला उद्यमिता मंच (डब्लयू. ई. पी.) -

महिला उद्यमिता मंच की स्थापना नीति आयोग ने देश भर की उभरती युवा महिला उद्यमियों के लिए उपयुक्त परिवेश उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की थी। इस पहल को लागू करने और बढ़ावा देने के वास्ते नीति आयोग ने मिडली (S.L.D.B.L) को भागीदार बनाया है।

 

2.  प्रधानमंत्री मुद्रा योजना -

भारत सरकार द्वारा शुरू की गई प्रमुख योजनाओं में शामिल यह योजना उन उत्साही महिला उद्यमियों को समर्थन और प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से चलाई गई है जो व्यूटी पार्लर, खुदरा दुकान या ट्यूशन केन्द्र जैसी कम लागत और आसानी शुरू किये जाने वाले स्टार्ट-अप लगाना चाहती है।

 

3.  स्त्री शक्ति ऋण -

भारतीय स्टेट बैंक द्वारा चलाई जा रही यह अनूठी योजना महिला उद्यमियों को कई रियासतें देने के लिए शुरू की गई है। इस योजना का लाभ पाने के लिए महिला उद्यमियों को पहले उद्यमिता विकास कार्यक्रम (इडीवी) में नाम दर्ज कराना होगा जिसमें व्यापार सफलतापूर्वक चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता है और उनकी कार्यकुशलता बढ़ाई जाती है।

 

4.  आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत विशेष उपाय -

कोविड-19 महामारी के पश्चात् माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी ने तत्परता से राष्ट्र निर्माण से एमएसएमई (M.S.M.E) की भूमिका को मान्यता दी । इस तरह एमएसएमई आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत घोषणाओं का एक बहुत महत्वपूर्ण भाग है। इस पैकेज के अंतर्गत एमएसएमई क्षेत्र को न केवल महत्वपूर्ण आबंटन किया गया है बल्कि अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के उपायों के कार्यान्वयन में प्राथमिकता प्रदान की गई है। देश में एमएसएमई क्षेत्र को तत्काल राहत प्रदाने करने के लिए़, इस पैकेज के अंतर्गत विभिन्न घोषणाएँ की गई हैं।

 

प्रमुख कार्यकलाप और उपलब्धियॉ:

1.   नई पहलें

·      आत्म निर्भर भारत पर राष्ट्रीय सम्मेलन

·      हरित उर्जा पर राष्ट्रीय सम्मेलन: भविष्य के लिए एमएसएमई सुदृढ़ीकरण

 

2.   वर्ष 2021-22(दिसम्बर, 2022 तक) के दौरान, संस्थान द्वारा संचालित राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय कार्यक्रम का निष्पादन नीचे सारणी में दिया गया है।

 

स्वामियों के जेंडर अनुसार द्वारा एमएसएमई स्वामित्व क राज्य - बार विवरण (एनएसएस 73वां दौर)

क्र.स.

राज्य संघ राज्य क्षेत्र

पुरूष

महिला

कुल

पुरूष स्वामित्व वाले सभी एमएसएमई में राज्य का हिस्सा (%)

महिला स्वामित्व वाले सभी एमएसएमई में राज्य का हिस्सा (%)

1

पश्चिम बंगाल

5583138

2901324

8484462

11.52

23.42

2

तमिलनाडु

3441489

1285263

4726752

7.10

10.37

3

तेलंगाना

1459622

972424

2432046

3.01

7.85

4

कर्नाटक

2684469

936905

3621374

5.54

7.56

5

उत्तर प्रदेश

8010932

862796

8873728

16.53

6.96

6

आंध्र प्रदेश

2160318

838033

2998351

4.46

6.76

7

गुजरात

2375858

826640

3202499

4.90

6.67

8

महाराष्ट्र

3798339

801197

4599536

7.84

6.47

9

केरल

1647853

495962

2143816

3.40

4.00

10

राजस्थान

2261127

380007

2641134

4.67

3.07

11

मध्य प्रदेश

2275251

370427

2645678

4.70

2.99

12

झारखंड

1250953

310388

1561341

2.58

2.51

13

ओडिशा

1567395

295460

1862856

3.24

2.38

14

पंजाब

1183871

224185

1408056

2.44

1.81

15

बिहार

3239698

168347

3408044

6.69

1.36

16

हरियाणा

831645

98309

929953

1.72

0.79

17

दिल्ली

827234

86742

913977

1.71

0.70

18

मणिपुर

86383

86604

172987

0.18

0.70

19

जम्मू और कश्मीर

624056

74785

698841

1.29

0.60

20

छत्तीसगढ़

727203

71201

798403

1.50

0.57

21

असम

1128411

66665

1195076

2.33

0.54

 

क्र.स.

राज्य/संघ राज्य क्षेत्र

पुरूष

महिला

कुल

पुरूष स्वामित्व वाले सभी एमएसएमई में राज्य का हिस्सा (%)

महिला स्वामित्व वाले सभी एमएसएमई में राज्य का हिस्सा (%)

22

हिमाचल प्रदेश

0.3296

50368

379963

0.68

0.41

23

मेघालय

72191

39462

111653

0.15

0.32

24

त्रिपुरा

179169

28042

207212

0.37

0.23

25

पुडुचेरी

65350

27072

92422

0.13

0.22

26

उत्तराखंड

380000

20964

400964

0.78

0.17

27

नागालैड

65778

20865

86643

0.14

0.17

28

मिजोरम

20439

13698

34137

0.04

0.11

29

गोवा

57133

10815

67948

0.12

0.09

30

अरूणाचल प्रदेश

16153

6274

22427

0.03

0.05

31

चंडीगढ

44321

5560

49881

0.09

0.04

32

सिक्किम

20880

5036

25916

0.04

0.04

33

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह

14302

4026

18328

0.03

0.03

34

दादरा और नागर हवेली

12900

2629

15529

0.03

0.02

35

दमण और दीप

5880

1560

7441

0.01

0.01

36

लक्षदीप

1384

488

1872

0.00

0.0

कुल

48450722

12390523

60841245

100.0

100.0

 

आगे की राह :- महिला उद्यमी भारतीय अर्थव्यवस्था विकास की सबसे अह्म कड़ियों में से है। महिलाओं की प्रगति के लिए शोध-पत्र में कुछ सुझाव इस प्रकार हैं -

1.   महिलाओं में उद्यमिता कौशल विकसित करने के लिए कम से कम लागत या मुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए।

2.   महिलाओं को बचपन से लेकर उच्च शिक्षा तक निःशुल्क पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध कराने वाले शिक्षण संस्थान खोले जाएं।

3.   उद्यमिता से जुड़ी गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए।

4.   सरकारी प्रोत्साहनों और योजनाओं के प्रति उन्हें जागरूक बनाया जाए।

5.   योजनाओं का लाभ पाने के लिए के वास्ते कागजी कार्रवाई को कम से कम किया जाए और पूरी प्रक्रिया सरल बनाई जाए।

 

निष्कर्ष -

महिला को विविध कार्य करने होते हैं और अनेक दायित्व निभाने पड़ते हैं जिससे उसे सामाजिक बंधनो के कारण अपना उद्यम चलाने के वास्ते कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों से महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन देने के उपाय उपलब्ध कराए गए है। भारतीय महिलाएँ सरकार और अन्य एजेंसियां द्वारा मुहैया किए जा रहे, विकास अवसरों के बारे में अनभिज्ञ रहती है महिलाओं को सफल उद्यमी बनाने में सहायता देने के लिए उन्हे विशेष प्रशिक्षण की सुविधाएं दी जानी चाहिए ताकि उनकी प्रतिभा और कौशल को निखारा जा सकें।

 

संदर्भ ग्रन्थ:

1.     डॉ. रंजना शर्मा “विमेन एंत्रप्रिन्योर्स इन इंडिया-इमर्जिंग इश्यूज एंड चैलेजेस” इंटरनेशनल जर्नल ऑफ डेवलपमेंट रिसर्च, वाल्यूः 07 अंकः 12 पुष्ठ: 17917-17923, दिसंबर, 2017 आईएसएसएनः 2230-992

2.     मायर्स, एस.पी 1984 द कैपिटल सट्रक्चर पजल।

3.     हैडबुक ऑन विमेन, ओन्ड एसएमईज, चैलेजेस एंड एवॉर्चुनिटीज इन पॉलिथिन एंड प्रोगाम्य।

4.     लाल मधुरिमा, एंड सहाय शिखा, 2008 विमेन इन फैमिली बिजनेस।

5.     बोवेन, डोनाल्ड डी और हिश रॉबर्ट डी (1986) द फिमेल एंजप्रेन्योरः ए कैरियर डेवलमेंट पर्सपेक्टिव, अकेडमी ऑफ मैनेजमैंट रिव्यूः Vol-2 अंक 3 पृष्ठ 393-407

6.     योजना - मासिक पत्रिका दिसंबर 2021

7.     वार्षिक रिपोर्ट: 2021-22, भारत सरकार, सूक्ष्म लघु और माध्यम उद्यम मंत्रालय उद्योग भवन नई दिल्ली पृष्ठ - 91, 92, 52, 53।

 

 

Received on 11.06.2025      Revised on 28.06.2025

Accepted on 22.07.2025      Published on 12.11.2025

Available online from November 19, 2025

Int. J. Ad. Social Sciences. 2025; 13(4):199-204.

DOI: 10.52711/2454-2679.2025.00032

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